EV खरीदने से पहले ये 5 Myths जरूर जानें – Real Facts Inside

पिछले कुछ सालों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों Electric Vehicle का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ा है । सोशल मीडिया , YouTube रिव्यू , और न्यूज़ चैनलों के कारण EV के बारे में खूब चर्चा हो रही है । लेकिन इसके साथ-साथ कई गलतफहमियाँ मिथक भी फैल चुकी हैं, जिनकी वजह से कई लोग EV खरीदने से डरते हैं । कोई कहता था , “EV की बैटरी 2–3 साल में खराब हो जाती है” , तो कोई कहता था “Electric Vehicle” में आग लग जाती है , बहुत रिस्की है” । अगर आप जाना चाहते हैं की इलेक्ट्रिक व्हीकल की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है तो आप हमारा पहला ब्लॉग पढ़ सकते हैं “इलेक्ट्रिक व्हीकल क्या है और ये कैसे काम करता है?

तो आज इस ब्लॉग में हम एक-एक करके देखेंगे कि क्या सच है और क्या सिर्फ अफवाह । 

EV

Myth 1- EV बैटरी बहुत जल्दी खराब हो जाती है

कई लोगों का मानना है कि इलेक्ट्रिक कार की बैटरी 2–3 साल में खराब हो जाती है, इसलिए EV लेना जोखिम भरा है। लेकिन सच यह है की ये है कि आज की EV बैटरियाँ 6–10 साल तक आराम से चलती हैं, और कई कंपनियाँ 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक की बैटरी वारंटी देती हैं। असल में, बैटरी की लाइफ ड्राइविंग स्टाइल, चार्जिंग आदतें और मौसम पर भी निर्भर करती है। मतलब सही देखभाल से बैटरी लंबा समय चल सकती है।

सच्चाई– आज की इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लगने वाली बैटरियाँ आसानी से 8–10 साल या 👉 5–2 लाख किलोमीटर तक चलने की क्षमता रखती हैं । Tata , MG , Hyundai जैसी कंपनियाँ 8 साल की बैटरी वारंटी भी दे रही हैं । इसलिए Electric Vehicle बैटरी मोबाइल बैटरी जैसी नहीं होती — ये लंबी लाइफ वाली टेक्नोलॉजी है । 

Myth 2इलेक्ट्रिक वाहन में तुरंत आग लग जाती है

न्यूज़ चैनलों पर आग लगने वाले क्लिप दिखाए जाते हैं जिससे लगता है कि Electric Vehicle खरीदना बहुत रिस्की है । जबकि सच यह है कि पेट्रोल/डीजल गाड़ियों में आग लगने के मामले EV से कई गुना ज्यादा हैं । 

सच्चाई– Electric Vehicle में इस्तेमाल होने वाली LFP और NMC बैटरियाँ काफी सुरक्षित होती हैं इनके अंदर सुरक्षा लेयर्स होती हैं अगर बैटरी ओवरहीट होती है तो BMS सिस्टम खुद पावर कट कर देता है । भारत में Electric Vehicle में आग लगने के रजिस्टर केस बहुत कम हैं और ज्यादातर गलत चार्जिंग या सस्ते चीनी चार्जर/बैटरी के कारण होते हैं । 

Myth 3इलेक्ट्रिक वाहन लंबी यात्रा के लिए अच्छी नहीं है

कुछ लोग मानते हैं कि EV सिर्फ शहर के अंदर चलाने के काम आती है और लंबी यात्रा में बीच रास्ते में बंद हो जाएगी। जबकि आज मार्केट में Nexon EV, MG ZS EV जैसी कारें एक बार की चार्जिंग में 350–450 km तक आराम से चलती हैं। देश में फास्ट चार्जिंग स्टेशन भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे लंबी यात्रा अब और आसान हो जाती है।

सच्चाई– आज की इलेक्ट्रिक कारें 300–500 km की रेंज आराम से दे सकती हैं फास्ट चार्जिंग स्टेशन बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं Tata Power , Jio-BP , Statiq , Zeon जैसी कंपनियाँ हर महीने नए चार्जिंग लोकेशन जोड़ रही हैं । 500–700 km की यात्रा Electric Vehicle से पूरी तरह पॉसिबल है , बस थोड़ा प्लानिंग चाहिए । 

Myth 4 EV चार्ज करने में बहुत समय लगता है

लोग कहते हैं कि Electric Vehicle चार्ज करने में 8–10 घंटे लगते हैं और यह बहुत असुविधाजनक है । 

सच्चाई- AC स्लो चार्जिंग घर पर रात भर आराम से की जा सकती है फास्ट चार्जिंग DC से सिर्फ 20–60 मिनट में 80 परसेंट चार्ज हो जाता है अगर आप रोजाना 40–50 km चलाते हैं तो आपको रोज चार्जिंग करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी । 

Myth 5EV की सर्विसिंग बहुत महंगी होती है

कुछ लोगों का मानना है कि Electric Vehicle की मेंटेनेंस कॉस्ट पेट्रोल कार से ज्यादा होती है

सच्चाई– इलेक्ट्रिक वाहन में इंजन , क्लच , गियरबॉक्स जैसी कई मूविंग पार्ट्स नहीं होते — इसलिए सर्विसिंग कॉस्ट 70–80 % कम होती है रनिंग कॉस्ट सिर्फ 1/- रुपये–2 प्रति km , जबकि पेट्रोल में 8/- रुपये–10 प्रति km 

निष्कर्ष– लोगों के मन में अभी भी EV को लेकर कई मिथक हैं , लेकिन असली सच यह है कि EV टेक्नोलॉजी अब काफी एडवांस और भरोसेमंद हो चुकी है । आज Electric Vehicle सिर्फ फैशन नहीं — भविष्य की जरूरत है । चार्जिंग स्टेशन और बैटरी टेक्नोलॉजी के सुधार के साथ आने वाले समय में हर घर में एक इलेक्ट्रिक कार होगी ।

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